Monday, January 30, 2012

बरसों के इंतज़ार का अंजाम लिख दिया

नुसरत फ़तेह अली की एक बेहतरीन क़व्वाली (ग़ज़ल)



बरसों के इंतज़ार का अंजाम लिख दिया
काग़ज़ पे श्याम काट के फिर श्याम लिख दिया

बिखरी पड़ी थी टूट के कलियाँ ज़मीन पर
तरतीब देके मै ने तेरा नाम लिख दिया

आसाँ नहीं थी तर्क-ए-मुहब्बत की दास्तां
जो आँसुओं ने आख़िरी पैग़ाम लिख दिया

हम को किसी के हुस्न ने शाइर बना दिया
होंठों का नाम ले न सके जाम लिख दिया

अल्लाह! ज़िंदगी से कहाँ तक निभाऊं मैं
किस बेवफा के साथ मेरा नाम लिख दिया

तक़सीम हो रहीं थी ख़ुदाई की नेमतें
इक इश्क़ बच गया सो मेरे नाम लिख दिया

'कैसर' किसी की दें है ये शायरी मेरी
उसकी ग़ज़ल पे किसने मेरा नाम लिख दिया

Wednesday, January 18, 2012

आया तेरे दर पर दीवाना

आ आ आ आ
आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ
जो बंदिशे थी ज़माने को तोड़ आया हूँ
मैं तेरे लिए दुनिया को छोड़ आया हूँ

आया तेरे दर पर दीवाना-२
आया, हो आया
आया तेरा दीवाना
आया तेरे दर पर दीवाना-२
तेरा दीवाना, तेरा दीवाना, तेरा दीवाना
आया तेरे दर पर दीवाना-२

तेरा दीवाना
तेरा..
तेरा दीवाना
दीवाना..
तेरा दीवाना
तेरा..
तेरा दीवाना
तेरा दीवाना, तेरा दीवाना, तेरा दीवाना
आया तेरे दर पर दीवाना-२

ये है तेरा ही सौदाई, ये है तेरा ही शैदाई-२
तेरे इश्क में है इसे मर जाना
आया तेरे दर पर दीवाना-२
आ आ आ

तेरा जलवा जो पाऊं, मैं हर ग़म भूल जाऊं
तेरा जलवा जो मैं पाऊं, मैं तो हर ग़म भूल जाऊं
ये आंसू जो हैं बहते, बस इतना हैं ये कहते
कहाँ तू और कहाँ मैं, पराया हूँ यहाँ मैं
आ आ आ

करम इतना गर हो, के मुझपर इक नज़र हो
करम इतना अगर हो, के मुझपर इक नज़र हो
जान-ओ-दिल वार दूं मैं, ज़िंदगी वार दूं मैं
जैसे शम्मा पे मरता है, परवाना
आया तेरे दर पर दीवाना-२
आया..
आ आ आ

आया तेरे दर पर तेरा ही दीवाना-२
दीवाना तेरा, दीवाना तेरा
दीवाना तेरा, दीवाना तेरा, दीवाना तेरा..
आ आ आ
दीवाना तेरा, दीवाना तेरा
दीवाना तेरा, दीवाना तेरा, दीवाना तेरा..
आ आ आ
दीवाना तेरा, दीवाना तेरा
दीवाना तेरा, दीवाना तेरा, दीवाना तेरा..

आया तेरे दर पर दीवाना, दीवाना दीवाना
आया किस मोड़ पे अफ़साना-२
(आ आ आ) आया किस मोड़ पे अफ़साना-२
(आ आ आ) आया किस मोड़ पे अफ़साना-२
आ आ आ

ये सितम का रिवाज क्यूँ है
जैसा है ये समाज, क्यूँ है
ये दुनिया की हैं रसमें, मैं हूँ अब इनके बस में
ये जो दुनिया की हैं रसमें, मैं हूँ अब इनके ही बस में
न पूछो क्या गिला है, मुझे ग़म क्यूँ मिला है
तुम्हे मैं क्या बातऊँ, मुहब्बत जुर्म है क्यूँ
कोई रोता है क्यूँ, ऐसा होता है क्यूँ
क्यूँ दिल से हरेक है, अनजाना
आया किस मोड़ पे अफ़साना-२

ये किस माहौल में हम हैं, ख़ुशी के भेस में ग़म हैं
किसे अपना कहें, किसे बेगाना
आया किस मोड़ पे अफ़साना-२
आ आ आ

आया किस मोड़ पे मेरा अफ़साना-२
अफ़साना मेरा, अफ़साना मेरा
अफ़साना मेरा, अफ़साना मेरा, अफ़साना मेरा
अफ़साना मेरा, अफ़साना मेरा, अफ़साना मेरा
अफ़साना मेरा, अफ़साना मेरा, अफ़साना मेरा
अफ़साना मेरा, अफ़साना मेरा, अफ़साना मेरा

आया किस मोड़ पे, अफ़साना, अफ़साना, अफ़साना
(आ आ आ) आया किस मोड़ पे मेरा अफ़साना-२
(आ आ आ) आया किस मोड़ पे मेरा अफ़साना-२
(आ आ आ) आया किस मोड़ पे मेरा अफ़साना-२

Sunday, January 23, 2011

होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा

हकीक़त फ़िल्म की ये नज़्म, दिल को छूकर जाती है:
होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा
ज़हर चुपके-से दावा जान के खाया होगा

दिल ने ऐसे भी कुछ अफ़साने सुनाए होंगे
अश्क़ आँखों ने पिए, और न बहाए होंगे
बंद कमरे में, जो ख़त मेरे जलाए होंगे
एक-इक हर्फ़ जबीं पर उभर आया होगा

उसने घबरा के नज़र लाख बचाई होगी
दिल की लुटती हुई दुनिया नज़र आई होगी
मेज़ से जब मेरी तस्वीर हटाई होगी
हर तरफ मुझको तड़पता हुआ पाया होगा

छेड़ की बात से अरमां मचल आये होंगे
ग़म दिखावे की हँसी में उबल आये होंगे
नाम पर मेरे जब आंसू निकल आए होंगे
सर न काँधे से सहेली के उठाया होगा

ज़ुल्फ़ जिद करके किसी ने जो बनाई होगी
और भी ग़म की घटा मुखड़े पे चाई होगी
बिजली नजरो ने कई दिन न गिराई होगी
रंग चेहरे पे कई रोज़ न आया होगा

होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा
ज़हर चुपके-से दावा जान के खाया होगा

(कैफ़ी आज़मी)

Wednesday, October 13, 2010

ओ माँ

तू कितनी अच्छी है, तू कितनी भोली है
प्यारी प्यारी है, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ
के ये जो दुनिया है, ये बन है कांटो का
तू फुलवारी है, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ

दुखने लागी है, माँ तेरी अंखिया - २
मेरे लिए जागी है तू सारी-२  रतियां
मेरी निंदिया पे, अपनी निंदिया भी
तूने वारी है, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ
तू कितनी अच्छी है, तू कितनी भोली है
प्यारी प्यारी है, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ

अपना नहीं तुझे सुख-दुःख कोई - २
मै मुस्काया, तू मुस्काई, मै रोया तू रोई
मेरे हँसने पे, मेरे रोने पे, 
तू बलिहारी है, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ
तू कितनी अच्छी है, तू कितनी भोली है
प्यारी प्यारी है, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ

माँ बच्चों की जाँ होती है - २
वो होते हैं क़िस्मत वाले, जिनके माँ होती है,
कितनी सुन्दर है, कितनी शीतल है,
न्यारी-२ है, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ,
तू कितनी अच्छी है, तू कितनी भोली है
प्यारी प्यारी है, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ

Monday, September 28, 2009

चन कित्थां गुजारी अइ

चन कित्थां गुजारी अइ
ओ चन कित्थां गुजारी अइ रात वे,
मेंडा दी दलीलां दे वात वे
ओ चन कित्थां गुजारी अइ
ओ चन कित्थां गुजारी अइ रात वे,
मेंडा दी दलीलां दे वात वे
चन कित्थां गुजारी अइ

कोठे ते फिर कोठडा, माई कोठे सुकदा, घा भला - २
आशका जोडियां पौडियां, ते मशूकां जोडे रा भला
ओ चन कित्थां गुजारी अइ
ओ चन कित्थां गुजारी अइ रात वे,
मेंडा दी दलीलां दे वात वे
ओ चन कित्थां गुजारी अइ

कोठे ते फिर कोठडा, माई कोठे सुकदी रेक थला - २
असां गुंदाइयां मेंडियां, तू केसे बहाने देख जरा, वे
ओ चन कित्थां गुजारी अइ
ओ चन कित्थां गुजारी अइ रात वे,
मेंडा दी दलीलां दे वात वे
ओ चन कित्थां गुजारी अइ

कोठे ते फिर कोठडा, माई कोठे ते लन्दूर धला - २
पेहली रोटी तूं खांवे, तैंडे साथी नसदे दूर धला
चन कित्थां गुजारी अइ
चन कित्थां गुजारी अइ रात वे,
मेंडा दी दलीलां दे वात वे
चन कित्थां गुजारी अइ

Saturday, March 14, 2009

पुत्त जट्टां दे

पंजाबी बोलियां...दिल को छू लेने वालीः

पुत्त जट्टां दे बलौन्दे बकरे, पुत्त जट्टां दे
जट्टां दे बलौन्दे बकरे, मोड्डेयां ते डांगां धरियां, भई कैंठे सोने दे
सोने दे गर्जणा, लमियां मटक नाल पब चकदे, भई चिट्टे चादरे
चादरे सुमरदे धरती, भई चिट्टे चादरे
चादरे सुमरदे धरती, गब्बां विच बन्द बोतलां, पासे हट जा
हट जा, जट्टां नूं राह छड दे नी रेशमी गरारे वालिए, लेओन्दे कलियां
कलियां, कन्ना ते हथ धर के, लेओन्दे कलियां
कलियां, कन्ना ते हथ धर के, खडी होके तूं वि सुण लै, नारे..
नारे, जट्टां दे पुत्त पौण बोलियां, नी मुटियारे, मुटियारे, मुटियारे...

जट्ट पाणियां पंजां दे धारू, भई जट्ट पाणियां
पाणियां पंजां दे धारू, उच्चे लम्मे छैल गबरू, विच कन्नां दे
कन्ना दे झूलदियां नटियां, हथां च डांगां सम्मां वाळियां, जदों तुरदे
तुरदे कलैरी मोर लगदे, भई जदों तुरदे
तुरदे कलैरी मोर लगदे, सिरां ते चीरे सत रंग दे, जेडे जट ने
जट ने मँगाए कलकत्तेयों भई, जेडे जट ने
जट ने मँगाए कलकत्तेयों, जोबरां दी टौर वखरी, दाणे
दाणॅ, जट्टां दे पुत्त ठेके मिलदे जा ठाणे, जा ठाणे, जा ठाणे...

जट्ट यारियां निभौंदे सिर देके, भई, जट्ट यारियां
यारियां निभौंदे सिर देके बा धम चाल छड दे, पुत्त जट्ट दा
जट्ट दा हीर लइ रांझा जट्टिए निसाध हो गया, जट्ट मिर्जा
मिर्जा जिन्डोरे हेठां भई, जट्ट मिर्जा
मिर्जा जिन्डोरे हेठां वाद गया जिन्द साइबां तो, पट्ट चीर के
चीर के खवौन्दे जट्ट यार नूं, चनाथ कुली पौण जानदे, सौणा...
सौणा, लबदी मर जाएगी, न जट्ट ध्यौणा, जट्ट ध्यौणा, जट्ट ध्यौणा...

जट्ट उत्ते ते टरॅक्टर हेठां भई, जट्ट उत्ते ते
उत्ते ते टरॅक्टर हेठां, बौन्दा फिरे पन्जेयां नूं, जट्ट खेतां च
खेतां च अगौन्दे फसलां, खेड लौन्दे तांणेयां दा, तोड अन्न दा
अन्न दा नी कर दित्ता पूरा, तोड अन्न दा
अन्न दा नी कर दित्ता पूरा, धनवान देस हो गया, पाके डन्डियां
डन्डियां राणियां बणियां, जट्टियां पंजाब दीयां, नारिये
नारिये, जट्टां दे पुत्त पौण बोलियां, करतारिये, करतारिये, करतारिये...

जट्ट सूरमे देश लई बल्लिये, जट्ट सूरमे
सूरमे देश लई बल्लिये, हंसके ने फांसी चढ़दे, कोई गबरू
गबरू सरबा बणदा, बणे कोई भगत सिंह नी, उधम सिंह कोई
सिंह कोइ लन्डन विच जाके, गोरा मार लैन्दा बदला, बाबे गदरी
गदरी ते बबर अकाली, बाबे गदरी
गदरी ते बबर अकाली, जिंद ला गए लेखे देश दे, हसदे
हसदे, देव कैंदा सदा ही पंजाबी रैण वसदे, रैण वसदे, रैण वसदे...

पुत्त जट्टां दे बलौन्दे बकरे, पुत्त जट्टां दे..

Monday, January 26, 2009

आओ बच्चो तुम्हें दिखाएं

आओ बच्चो तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम ...

उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है
दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है
जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है
बाट-बाट पे हाट-हाट में यहाँ निराला ठाठ है
देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की,
इस मिट्टी से ...

ये है अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे
इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे
ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे
कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्‍मिनियाँ अंगारों पे
बोल रही है कण कण से कुरबानी राजस्थान की
इस मिट्टी से ...

देखो मुल्क मराठों का ये यहाँ शिवाजी डोला था
मुग़लों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था
हर पावत पे आग लगी थी हर पत्थर एक शोला था
बोली हर-हर महादेव की बच्चा-बच्चा बोला था
यहाँ शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की
इस मिट्टी से ...

जलियाँ वाला बाग ये देखो यहाँ चली थी गोलियाँ
ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियाँ
एक तरफ़ बंदूकें दन दन एक तरफ़ थी टोलियाँ
मरनेवाले बोल रहे थे इनक़लाब की बोलियाँ
यहाँ लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की
इस मिट्टी से ...

ये देखो बंगाल यहाँ का हर चप्पा हरियाला है
यहाँ का बच्चा-बच्चा अपने देश पे मरनेवाला है
ढाला है इसको बिजली ने भूचालों ने पाला है
मुट्ठी में तूफ़ान बंधा है और प्राण में ज्वाला है
जन्मभूमि है यही हमारे वीर सुभाष महान की
इस मिट्टी से ...

(प्रदीप)