Tuesday, March 14, 2006

‘नासदीय सूक्त’ - ऋग्वेद

भारत एक खोज याद है?

सृष्टि से पहले सत नहीं था, असत भी नहीं
अंतरिक्ष भी नहीं, आकाश भी नहीं था
छिपा था क्या कहाँ, किसने देखा था
उस पल तो अगम, अटल जल भी कहाँ था

सृष्टि का कौन है कर्ता कर्ता है यह वा अकर्ता
ऊंचे आसमान में रहता सता अध्यक्ष बना रहता
वही सचमुच में जानता, या नहीं भी जानता
हैं किसी को नहीं पता नहीं है पता

वो था हिरण्यगर्भ सृष्टि से पहले विद्यमान
वही तो सारे भूतजगत का स्वामी महान
जो है अस्तित्व में धरती आसमान धारण कर
ऐसे किस देवता की उपासना करें हम हवि देकर

जिस के बल पर तेजोमय है अम्बर
पृथ्वी हरी भरी स्थापित स्थिर
स्वर्ग और सूरज भी स्थिर
ऐसे किस देवता की उपासना करें हम हवि देकर

गर्भ में अपने अग्नि धारण कर पैदा कर
व्यापा था जल इधर उधर नीचे ऊपर
जगा चुके वो ऐकमेव प्राण बनकर
ऐसे किस देवता की उपासना करें हम हवि देकर

ॐ! सृष्टि निर्माता स्वर्ग रचियता पूर्वज रक्षा कर
सत्य धर्म पालक अतुल जल नियामक रक्षा कर
फैली हैं दिशाएँ बाहू जैसी उसकी सब में सब पर

ऐसे ही देवता की उपासना करें हम हवि देकर
ऐसे ही देवता की उपासना करें हम हवि देकर

2 comments:

Abhinav S Bhatele said...

बहुत अच्छा लगा आपका संग्रह पढ़कर। कुछ त्रुटियाँ हैं नासदीय सूक्त तथा कदम्ब का पेड़ में - मेरे ब्लौग पर सही की हैं मैंने, देख लीजियेगा।

Chaubal said...

कहा् है आपका ब्लॉग.?